रामयण की पुनर्व्याख्या

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रामयण की पुनर्व्याख्या
रामयण की पुनर्व्याख्या रामयण की पुनर्व्याख्या

काव्य गुणों की दृष्टि से वाल्मीकि रामायण एक अद्वितीय महाकाव्य है। यह भारतीय संस्कृति का आधार ग्रंथ होने के साथ-साथ सामाजिक एवं राष्ट्रीय जीवन का मूलाधार भी है। इस माहाकाव्य में महर्षि वाल्मीकि ने प्रकृति चित्रण, संवाद-संयोजन तथा विषय प्रतिपादन अद्भुत शैली में किया है। श्रीराम इस महाकाव्य के नायक हैं। रामायण में महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम के चरित्र को एक श्रेष्ठ मानव के रूप में चित्रित किया है। दैविक विशिष्टता तथा असाधारण गुणों से परिपूर्ण होते हुए भी श्रीराम अपने किसी क्रियाकलाप से मानवेतर प्रतीत नहीं होते। उनके चरित्र का वर्णन पुरुषोत्तम के रूप में ही किया गया है। दुष्टों का संहार करते समय उन्होंने कहीं भी किसी वैष्णवी शक्ति का उपयोग नहीं किया है। सागर पार करने के लिए सेतु निर्माण हेतु उन्होंने किसी भी प्रकार की माया का उपयोग नहीं किया है। लक्ष्मण की मुच्र्छित अवस्था को दूर करने में श्रीराम का कोई भी प्रताप दृष्टिगत नहीं होता है। सम्पूर्ण महाकाव्य में श्रीराम आम मनुष्य की भॉति ही दूसरों के सहयोग से अपना समस्त कार्य संपन्न करते हैं। 

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